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Thursday, 5 July 2018

तीखे और गर्म खाने से होती नकसीर की परेशानी


अचानक नाक से खून बहना यानी नकसीर की समस्या। ऐसा गर्मी और सर्दी दोनों में हो सकता है। लेकिन गर्मी के मौसम में इसकी शिकायतें अधिक रहती है। चरक संहिता में इस रोग को उध्र्व रक्तपित्त के नाम से समझाया गया है। इस रोग का तुरंत उपचार कराना चाहिए। नकसीर होने पर इसे नजरअंदाज न करें। वरना यह समस्या बढ़ सकती है। अधिकतर इसकी शिकायत बच्चों में मिलती है। जानें क्या हैं इसके कारण और उपचार के तरीके ...।
नकसीर आने पर सिर को ऊपर करके नाक से आ रहे ब्लड को न रोकें। सिर नीचे झुकाएं ताकि नाक से आ रहा खून निकल जाए।
कारण : खानापान में गड़बड़ी
गर्म, तीखी, खट्टी व नमकीन चीजें पेट में जलन पैदा करती हैं। साथ ही तेज धूप में रहने से नकसीर आने की आशंका बढ़ जाती है। चिकनाई युक्त गर्म खाना इस रोग का मुख्य कारण है। पित्त के बढऩे से दूषित रक्त के रूप में यह नाक से बाहर निकल जाता है। रोगी हष्टपुष्ट हो और मर्ज पुराना न हो तो यह आसानी से ठीक हो जाता है। यह रोग अगर शीतकाल में हुआ हो तो आसानी से ठीक हो जाता है और गर्मी में हुआ तो इसका इलाज कठिन हो जाता है।
उपचार : अनार व आंवला कारगर
इसके ज्यादातर मामलों में कुछ समय बाद रक्तस्त्राव बंद हो जाता है। लेकिन ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए खानपान में सावधानी बरतें।
नकसीर आने के बाद उपवास रखें। इसके बाद सत्तू को पानी में घोलकर पीएं।
खट्टी चीजें हालांकि इस रोग में मना होती हैं लेकिन अनार व आंवले का प्रयोग इसमें विशेष लाभकारी होता है।
धान के चूर्ण में गाय का घी व शहद मिलाकर खाएंं।
मूंग, मसूर, चना और अरहर की दाल का पानी पीएं।
पटोल, नीम, बांस, प्लक्ष, चिरायता, कांचनार के फूल को पानी में उबालें और घी मिलाकर पीएं।
गाय का दूध, अंगूर, गन्ना, दूर्वा व प्याज के रस की दो-दो बूंद नाक में डालने से नकसीर में लाभ मिलता है।
मुनक्का व छोटी हरड़ के क्वाथ में शहद व चीनी मिलाकर पीने से लाभ होता है।
चाय-कॉफी या गर्म पेय से दूरी बनाएं। छाछ, दही, लस्सी या ठंडे पेय को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। इसके अलावा मौसमी फल भी ले सकते हैं।
यह भी है चिकित्सा
चरक संहिता के मुताबिक, प्रकृति इस रोग की चिकित्सा में सहायक है। नदी, तालाब (जिसमें कमल खिले हों) के किनारे रहना कारगर है। रात को चंद्रमा देखने से भी यह रोग शांत हो जाता है। इसके अलावा कमल और केले को पत्तों को बिछौने के रूप में प्रयोग करने से भी रक्तपित्त रोग की गर्मी में राहत मिलती है।


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