बॉलीवुड इंडस्ट्री के हीमैन धर्मेन्द्र वर्षों से देश-विदेश में फैले अपने करोड़ों फैंस का मनोरंजन कर रहे हैं। 82 साल के होने बाद भी धर्मेन्द्र इंडस्ट्री में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने सिने कॅरियर के शुरुआती दौर में वो दिन भी देखे थे जब निर्माता-निर्देशक ने उन्हें कहा था कि बतौर अभिनेता आप फिल्म इंडस्ट्री के लिए उपयुक्त नहीं हैं और आपको अपने घर वापस लौट जाना चाहिए। लेकिन धर्मेन्द्र ने हार नहीं मानी और साल 1960 में आई फिल्म 'दिल भी तेरा हम भी तेरे' से अभिनय की शुरुआत करने के बाद पूरे तीन दशक तक धर्मेन्द्र मनोरंजन इंडस्ट्री में छाए रहे हैं। उन्हें स्कूली दिनों से ही फिल्मों का इतना चाव था कि उन्होंने फिल्म 'दिल्लगी' को 40 से अधिक बार देखा था।
पहली फिल्म के लिए साइनिंग अमाउंट में मिले थे 51 रुपए:
एक फिल्मफेयर प्रतियोगिता के दौरान धर्मेन्द्र, अर्जुन हिंगोरानी को पसंद आ गए और उन्होंने अपनी फिल्म 'दिल भी तेरा हम भी तेरे' के लिए 51 रुपए साइनिंग अमाउंट देकर उन्हें हीरो की भूमिका के लिए साइन किया गया था। पहली फिल्म में उनकी नायिका कुमकुम थीं। हालांकि, पहली फिल्म से कुछ विशेष पहचान नहीं बन पाई थी इसलिए अगले कुछ सालों तक उन्हें संघर्ष करना पड़ा। संघर्ष के दिनों में वह जुहू में एक छोटे से कमरे में रहते थे।
धर्मेन्द्र ने निभाए हर तरह के रोल:
रोल चाहे फिल्म 'सत्यकाम' के सीधे सादे ईमानदार हीरो का हो, 'शोले' के एक्शन हीरो का हो या फिर 'चुपके चुपके' के कॉमेडियन हीरो का, सभी को सफलतापूर्वक निभाया। उन्होंने अपने कॅरियर में कॉमेडी, ट्रेजडी और इमोशनल सभी तरह के किरदार निभाकर पर्दे पर अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया है।
200 से अधिक फिल्मों में किया अभिनय:
धर्मेन्द्र अपने कॅरियर में अब तक 200 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके हैं, जिसमें अलग-अलग जोनर की फिल्में शामिल हैं। फिल्म 'अनपढ़', 'बंदिनी', 'सूरत और सीरत' से लोगों उन्हें जाना लेकिन उनको पहचान मिली ओ. पी. रल्हन की फिल्म 'फूल और पत्थर' से। उन्होंने अपने फिल्मी कॅरियर में 'अनुपमा', 'मंझली दीदी', 'सत्यकाम', 'शोले' और 'चुपके चुपके' जैसी कभी ना भूलने वाली फिल्में भी की हैं।
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