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Friday, 24 August 2018

दाईं कलाई पर बांधी जाती है राखी, रक्षासूत्र बांधने से मिलती है ये तीन चीज़ें

प्रेम और रिश्ते की मिठास का खास त्यौहार है रक्षाबंधन। रक्षाबंधन के इस पवित्र पर्व पर बहनें आपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं, और उससे अपनी रक्षा का वचन मांगती हैं। सबसे पहले राखी माता लक्ष्मी नें देत्यराज बली को बांधी थी। तभी से रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है, इस खास व पवित्र त्यौहार पर हमें कुछ नियमों का पालन भी करना चाहिए। हालांकि आजकल के दौर में इन नियमों का पालन कोई नहीं करता। लेकिन क्या आपको पता है भाई की किस कलाई पर राखी बांधना चाहिए। यदि नहीं तो हम आपको बता रहे हैं के भाई की किस कलाई पर राखी बांधना चाहिए और क्यों।

दरअसल आध्यात्मिक नियमों के अनुसार भाई की दाईं कलाई पर राखी बांधना चाहिए। आज के माडर्न जमाने में इसे लेकर कई तरह की राय रखी जाती हैं। कुछ मानते हैं कि राखी को किसी भी हाथ पर बांधने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन मान्यताओं के अनुसार ऐसा नहीं है ये गलत है। राखी मान्यताओं के अनुसार भाई की दाहिनी कलाई पर ही बहन को राखी बांधना चाहिए। धार्मिक कार्यों में भी सभी काम सीधे हाथ से ही किए जाते हैं। माना जाता है कि शरीर का दाहिना हिस्सा हमेशा सही मार्ग दिखाता है। शरीर के दाहिने हिस्से में नियंत्रण शक्ति भी ज्यादा होती है। शास्त्रों में भी बाएं हाथ के इस्तेमाल को अशुभ माना गया है। इन वजहों से भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधना ही शुभ माना जाता है।

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कलाई पर राखी बांधने के तीन अलग-अलग कारण बताए गए हैं, तीनों का पालन करने से व्यक्ति के जीवन में तरक्की तो होती ही है और साथ ही उसके सभी दुर्गुणों का नाश भी हो जाता है..आइए जानते हैं तीन कारण जिनकी वजह से कलाई पर बांधि जाती है राखी....

आध्यात्मिक कारण

आध्यात्मिक कारण कहता है की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश तथा लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। ब्रह्मा की कृपा से कीर्ति, विष्णु कृपा से सुरक्षा और महेश की कृपा से सभी दुर्गुणों का नाश होता है। लक्ष्मी की कृपा से धन-दौलत, सरस्वती की कृपा से बुद्धि-विवेक तथा दुर्गा की कृपा से शक्ति की प्राप्त होती है।

आयुर्वेदिक कारण

आयुर्वेद के अनुसार शरीर की प्रमुख नसें कलाई से होकर गुजरती है जो कलाई से ही नियंत्रित भी होती हैं। कलाई पर रक्षासूत्र बांधने से त्रिदोष वात, पित्त और कफ का नाश होता है। इसके अलावा इससे लकवा, डायबिटीज, हृदय रोग, ब्लड-प्रेशर जैसे रोगों से भी सुरक्षा होती है।

मनोवैज्ञानिक कारण

मनोवैज्ञनिक कारणों के अनुसार बताया गया है की रक्षासूत्र यानी राखी बांधने से मनुष्य को किसी बात का भय नहीं सताता है। मानसिक शक्ति मिलती है, मनुष्य गलत रास्तों पर जाने से बचता है। मन में हमेशा शांति और पवित्रता बनी रहती है।

रक्षाबंधन पर राखी बांधते समय इस मंत्र का उच्चारण करें

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वां अभिबन्धामि रक्षे मा चल मा चल।



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