बदलती जीवनशैली और वातावरण में मौजूद विषाक्त कणों के कारण आज के समय में कैंसर जैसी बीमारी तेजी से सामने आ रही है। महिलाएंं भी इससे अछूती नहीं हैं। कैंसर के कई कारण हैं इनमें से एक प्रमुख कारक तंबाकू है।
नेशनल इंस्टीटयूट ऑव कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (एनआईसीपीआर) के अनुसार भारत में करीब 35 फीसदी वयस्क तंबाकू का सेवन करते हैं। वहीं युवा वर्ग में भी इसका आंकड़ा 30 फीसदी तक पहुंच चुका है। तम्बाकू में चार हजार तरह के कैमिकल मौजूद होते हैं जिसमें कई कैंसर कारक कैमिकल भी शामिल हैं। इन कैमिकल में निकोटिन नामक मुख्य कैमिकल मौजूद होता है जिसका सेवन करने पर व्यक्ति शारीरिक और मानसिक तौर पर इस कैमिकल का आदी हो जाता है।
तंबाकू से महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसर
मुंह का कैंसर
गले का कैंसर
स्वर नलिका का कैंसर
गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर
मस्तिष्क का कैंसर
भोजन नली
फेफड़े का कैंसर
तंबाकू से होने वाले अन्य रोग
हदय रोग
स्ट्रोक
दंत रोग
मसूड़ों की परेशानी
एसिडिटी
ठ्ठगर्भस्थ शिशु का क्षीण विकास
प्रजनन क्षमता में कमी
त्वचा का लचीलापन कम होना।
तंबाकू का उपयोग होता है
दंत मंजन
बीड़ी
सिगरेट
मुंह में खैनी का रखना
दूसरों के लिए भी खतरा है
पैसिव स्मोकिंग (जीवन साथी या कार्यस्थल पर मौजूद लोग जो अधिक धूम्रपान करते हंै। उनके सिगरेट का धुंआ भी सांस लेने पर दूसरों के फेफड़ों तक पहुंचता है।)
कैंसर के कारण और पहचान
यूट्रस का कैंसर
आज महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से जुड़े मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। इस कैंसर में तंबाकू एक प्रमुख कारण है। तंबाकू के हानिकारक कैमिकल कैंसर को बढाते हैं। जननांगों की सफाई पर ध्यान न देना, अधिक व्यक्तियों से यौन संबंध, एचपीवी वायरस के कारण भी गर्भाशय का कैंसर होता है।
इन लक्षणों पर हो जाएं सतर्क
यौन संबंध बनाने के बाद योनि से रक्तस्राव होना।
माहवारी के बीच में रक्तस्त्राव होना।
योनि मार्ग से गंदे बदबूदार पानी का स्राव होना।
फेफ ड़ों का कैंसर
इस रोग का प्रमुख कारण तंबाकू है। टार, सिगरेट व अन्य जहरीले धुओं के कारण महिलाओं को फेंफडों का कैंसर हो सकता है। इस बीमारी से बचने के लिए महिलाओं को प्रदूषित इलाकों, सिगरेट पीने और सिगरेट पीने वाले व्यक्तियों से दूरी रखनी चाहिए। कुछ महिलाओं को आनुवांशिक कारणों की वजह से भी ये बीमारी हो सकती हैं।
इन लक्षणों पर हो जाएं सतर्क
लंबे समय तक खांसी का ठीक ना होना।
सांस फूलना।
खांसी के साथ खून आना।
सीने में दर्द।
आवाज में बदलाव।
भूख ना लगना
वजन में कमी आना।
पेट व मलाशय का कैंसर
महिलाओं को पेट व मलाशय का कैंसर भी हो सकता है। हालांकि इस बीमारी के पीछे अनुवांशिक कारणों के अलावा शराब व सिगरेट पीना, बाज़ार में मिलने वाले तैयार खाद्य पदार्थ का अधिक सेवन करना तथा ताजा फलों व सब्जियों का सेवन ना करने से आप इस बीमारी की गिरफ्त में आ सकते हैं। सही जीवनशैली को अपनाकर इस बीमारी से काफी हद तक दूर रहा जा सकता है।
इन लक्षणों पर हो जाए सतर्क
खाना खाने के बाद पेट का ज्यादा फूला हुआ महसूस होना।
खाना निगलने में दिक्कत होना।
सीने में जलन महसूस होना।
पाचन कार्य सही तरह से ना होना।
उल्टी आना, उल्टी में खून आना।
शौच की आदतों मे परिवर्तन।
कैंसर से होने वाले नुकसान
कैंसर होने के बाद महिलाओं को शारीरिक कष्ट के साथ ही मानसिक और आर्थिक परेशानियों से गुजरना पड़ता है।
उपचार लम्बा और महंगा होने के कारण रोगी उपचार ना करवाने का निर्णय भी ले लेता है।
बीमारी से पहले नशेे पर पैसा खर्च होता है और बीमारी के बाद उससे कई गुना ज्यादा खर्च उपचार पर होता है।
घर की महिला के रोगी होने पर पूरा परिवार इस रोग के दर्द से परेशान होता है।
जीवनशैली में लाएं यह बदलाव
तंबाकू और इससे जुड़े अन्य उत्पादों से दूरी बनाए रखें।
नियमित रूप से व्यायाम करें और अपनी जीवनशैली में सुधार लाएं।
भोजन में फल और सब्जियों की मात्रा को बढ़ाएं और बाजार का खाना ना खाएं।
अगर आपके परिवार को कोई भी सदस्य या साथी धूम्रपान करता है तो उसकी आदत को छुडवाएं अन्यथा उस व्यक्ति के धूम्रपान का नकारात्मक असर आप पर भी पडेगा।
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