स्कंद षष्ठी अर्थात शत्रुओं के संहारक युद्ध के देवता भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के पुत्र श्री कार्तिकेय की पूजा का दिन । शास्त्रों में इस पूजा को बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है, वैसे तो स्कंद षष्ठी की त्यौहार भारत के कई हिस्सों में मनाया जाता है लेकिन दक्षिण भारत में बहुत ही धुमधाम से मनाया जाता है । भगवान कार्तिकेय को मुरुगन के नाम से भी जाना जाने वाले इन देवता के इस विशेष मंत्र का जप श्रद्धा पूर्वक किया जाये तो व्यक्ति के सारे शत्रुओं की शत्रुता का नाश हो जाता है ।
स्कंद षष्ठी को कुमार षष्ठी भी कहा जाता है । माँ दुर्गा के पांचवे स्वरूप स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में जाना जाता है। नवरात्री के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। कहतें है इस दिन पूजा और व्रत करने से भगवान कार्तिकेय की कृपा प्राप्त होती है और मनुष्य के सभी दुःख, रोग और दरिद्रता दूर होतें है ।
स्कन्द पुराण के अनुसार जब कामदेव भगवान शिवजी के क्रोधाग्नि से भस्म हुए थे तब महादेव के अंश छह भागो में बंट कर गंगा नदी में गिर गए थे। तब देवी गंगा ने उन छह अंशो को जंगल में रखा और उनसे छह पुत्रों का जन्म हुआ। बाद में माता पार्वती ने एक एक कर भगवान कार्तिकेय के छह रूपों को बनाया। इन्ही भगवान ने दुष्ट राक्षस तारकासुर और अन्य राक्षसों का वध करके देवताओं का उद्धार किया और उन्हें उनके आतंक से बचाया ।
स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय के इस एक दिव्य मंत्र का जप कम से कम ग्यारह सौ बार जप कर लिया जाये तो ज्ञात अज्ञात सभी तरह के शत्रुओं का नाश हो जाता हैं । मंत्र जप के पूर्व पंचोपचार पूजन करने से पूजा शीघ्र फलदायी होने लगती है ।
इस मंत्र का करें जप
।। ॐ तत्पुरुषाय विधमहे: महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कंदा प्रचोदयात ।।
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