हमारे गले के पिछले हिस्से में लचीले ऊतकों से बने हुए दो पिंड होते हैं। इन्हें टॉन्सिल कहते हैं। ये हमारे गले में फिल्टर का कार्य करते हैं। मुंह से आने वाले कीटाणु व अन्य जीवाणु को आगे सांस की नली व फेफड़ों में जाने से रोकते हैं।
रोग की आशंका : टॉन्सिल संक्रमित होने पर लाल हो जाते हैं और इनमें सूजन आ जाती है। यह परेशानी बच्चों को ज्यादा प्रभावित करती है। कई बार टॉन्सिल में संक्रमण बार-बार होने लगता है जिससे कई अन्य तरह की समस्याएं हो सकती हैं।
प्रमुख लक्षण : गले में दर्द और खराश होना, टॉन्सिल लाल होना, सफेद या पीली परत आना, छाले होना, आवाज में परिवर्तन या आवाज का बंद होना। सिरदर्द, कान में दर्द, कुछ खाने-पीने के दौरान निगलने में दर्द व परेशानी महसूस होना और हल्का बुखार आदि।
होम्योपैथी दवाइयां -
बेलाडोना, आरसेनिक अल्बम, बेरायटा कार्ब, हीप सल्फ, साइलिशिया, कालीम्यूर आदि दवाएं विशेषज्ञ की सलाह से ली जा सकती हैं।
परहेज -
खट्टी चीजों व लिक्विड डाइट से बचें, फास्ट फूड न खाएं, चॉकलेट्स खाने से परहेज करें। सीधे कूलर व एसी की हवा में ना सोएं। कमरे का तापमान सामान्य रखें। किसी भी तरह की तकलीफ होने पर डॉक्टर को जरूर दिखाएं और उनके परामर्श के बिना दवा का प्रयोग न करें।
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