गलत खानपान, अनियमित दिनचर्या व अन्य कर्इ शारीरिक परेशानियाें की वजह से किडनी में पथरी समस्या हाे सकती है। कर्इ बार ताे यह पेशाब के जरिए अपने आप निकल जाती है, लेकिन कर्इ शरीर के अंदर ही रहकर गंभीर रूप ले लेती है। आइए जानते हैं किडनी की पथरी के बारे में :-
किडनी में पथरी किस उम्र में होती है ?
इस अंग में पथरी किसी भी उम्र में हो सकती है। लेकिन यह मध्य उम्र के लोगों में अधिक होती है। विशेषकर अधिक तापमान वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में।
इसकी वजह क्या है?
किडनी में पथरी होने के मुख्य कारण हैं विटामिन-'ए' की कमी, डिहाइड्रेशन, पेशाब में संक्रमण या रुकावट, शरीर के आधे हिस्से में लकवा, हाइपर पैराथायरॉइडिज्म, लिवर रोग आदि।
मुख्य लक्षण क्या होते हैं?
पेट में दायीं व बायीं ओर दर्द होना, उल्टी, पेशाब में जलन व टीस उठना, पेशाब का रुकना/खून/मवाद, बुखार व हाइपरटेंशन आदि।
इसका जल्द से जल्द पता कैसे किया जाए?
साधारण जांच से पथरी का पता लगाया जा सकता है। एक्स-रे या सोनोग्राफी व पेशाब की जांच से इसका पता लगाया जाता है।
इलाज कैसे संभव है?
किडनी की पथरी के इलाज के लिए कई तकनीकें उपलब्ध हैं। जैसे अधिक मात्रा में पानी पीने व दवा से एक सेमी से छोटी पथरी निकल जाने की संभवना होती है। तीन सेमी से छोटी पथरी बिना चीरे के आसानी से टुकड़े करके निकाली जा सकती है।
इलाज न लेने के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं?
स्टोन साइलेंट भी हो सकता है जिसमें लक्षण कभी-कभी ही सामने आते हैं। इसके अलावा किडनी खराब होना या इसमें मवाद पडऩा और इस अंग के फेल होने की आशंका रहती है। साथ ही कैंसर भी हो सकता है।
पथरी की रोकथाम के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
प्रर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। लिवर रोगों का इलाज लें। अधिक चाय, कोल्ड ड्रिंक, अल्कोहल, खट्टे फल आदि से परहेज करें। दूध व दूध से बने पदार्थ, स्ट्रॉबेरी व मांस आदि का प्रयोग कम से कम करें।
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