छोटे करेले जैसा नजर आने वाला ककोड़ा या खेखसा अधिकतर पहाड़ी जमीन में उगता है। इसका साग बहुत ही स्वादिष्ट और कई औषधीय गुणों से युक्त होता है।
गर्म-मसालों या लहसुन के साथ ककोड़े का साग बनाकर खाने से वात रोगों में आराम मिलता है।
विभिन्न शोधों के अनुसार ककोड़े का इस्तेमाल करने से जहरीले जानवरों के विष का प्रभाव भी कम हो जाता है।
यह कब्ज दूर कर रक्त को साफ करने का काम करता है।
ककोड़ा भूख बढ़ाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा करता है।
इसका चूर्ण बनाकर खाने से कफ दूर होता है। इसके इस्तेमाल से आंखों के दर्द और खांसी में भी लाभ मिलता है।
इसके पत्तों, कालीमिर्च और लाल चंदन को एक साथ पीसकर लेप बना लें। इस लेप को नारियल पानी में मिलाकर सिर पर लेप करें, सिरदर्द में आराम मिलेगा।
सूखे ककोड़े का चूर्ण बनाकर सूंघने से पीलिया में आराम मिलता है।
ककोड़े की सब्जी बनाकर खाने से कफ, बुखार, गैस व पेटदर्द की शिकायत दूर होती है।
बवासीर या अतिसार से पीडि़त रोगी को सूखे ककोड़े को कूटकर चूर्ण बनाकर रोजाना सेवन करना चाहिए।
ककोड़े के सेवन से मस्से सूखकर झड़ जाते हैं और मर्ज ठीक होता है।
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