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Monday, 24 September 2018

पितृपक्ष के 16 दिनों में ही चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे अधिक निकट इसलिए आ जाता हैं, जाने रहस्य

पितृ लोक को चन्द्र लोक के नाम से भी जाना जाता हैं, पितृपक्ष में यानी की आश्विनी मास के कृष्ण पक्ष की मृतक तिथि में पितरों के श्राद्ध कर्म किये जाने का शास्त्रोंक्त विधान है । वैज्ञानिक भी अब इसकी महत्ता को पूरी तरह से स्वीकार कर चूके है । वैज्ञानिकों के अनुसार पितृपक्ष के दिनों में चन्द्रमा साल के अन्य महीनों की तुलना में पृथ्वी के अधिक निकट आ जाता है । फलतः उसकी आकर्षण शक्ति का प्रभाव पृथ्वी तथा उसमें नित्रासरत प्राणियोँ पर अधिक पड़ता है । ऐसी स्थिति में चन्द्र लोक के ऊपरी भाग में रहने वाली सूक्ष्म शरीर धारी पितरों की आत्माएं भूलोक की संपत्ति से सहज ही श्रद्धा स्वरूप श्राद्ध स्वीकार कर लेती है । जैसे सशक्त रेडियो क्रिस्टल देश देशान्तरों तक की सूचनाओं को खींच सकने में सक्षम होता है उसी तरह की सच्ची श्रद्धा पितरों के प्रति विकसित कर ली जाए तो उनके स्नेह, सहयोग और सत्परामर्शों का लाभ आसानी से उठाया जा सकता है ।

पितरों की कृपा पाने के लिए पितृपक्ष की इन तिथियों में करें अपने पितरों का श्राद्ध कर्म

श्राद्ध पक्ष प्रारंभ हुआ
पितृपक्ष/ श्राद्ध पक्ष तिथि निर्णय

24 सितंबर 2018 - (सोमवार), पूर्णिमा श्राद्ध - अथर्व श्रावणी
25 सितंबर 2018 -(मंगलवार), प्रतिपदा- (पहला श्राद्ध)
26 सितंबर (बुधवार), द्वितीया श्राद्ध- (दूसरा श्राद्ध)
27 सितंबर 2018- (गुरुवार), तृतीया श्राद्ध - (तीसरा श्राद्ध)
28 सितंबर 2018- (शुक्रवार), चतुर्थी श्राद्ध (चौथा श्राद्ध)
29 सितंबर 2018- (शनिवार), पंचमी श्राद्ध- ( पांचवां श्राद्ध)
30 सितंबर 2018- (रविवार), षष्ठी श्राद्ध (छठां श्राद्ध )
01 अक्टूबर 2018- (सोमवार), सप्तमी श्राद्ध (सातवां श्राद्ध)
02 अक्टूबर 2018- (मंगलवार), अष्टमी श्राद्ध (आठवां श्राद्ध)
03 अक्टूबर 2018- (बुधवार), नवमी श्राद्ध (नौवां श्राद्ध)
04 अक्टूबर 2018- (गुरुवार), दशमी श्राद्ध (दसवां श्राद्ध)
05 अक्टूबर 2018- (शुक्रवार), एकादशी श्राद्ध (ग्यारस श्राद्ध)
06 अक्टूबर 2018- (शनिवार), द्वादशी श्राद्ध (बारहवां श्राद्ध)
07 अक्टूबर 2018- (रविवार), त्रयोदशी + चतुर्दशी श्राद्ध, ( तेहरवां + चौदहवां श्राद्ध)
08 अक्टूबर2018- (सोमवार), अमावस्या श्राद्ध, सर्व पितृश्राद्ध, महालय समाप्त ।
09 अक्टूबर 2018- दिन मंगलवार, स्नान दान तर्पण की भौमवती अमावस्या मातामह श्राद्ध, ( दिन में सुबह 8:54 से सुबह 10:34 तक )

अपने पूर्वजों की तय श्राद्ध तिथि में श्राद्ध कर्म अवश्य करें ।



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