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Friday, 21 September 2018

पितर पक्ष में इन 5 को भोजन देना नहीं भूले, इनके किए भोजन से ही तृप्त होते हैं सारे पितृ

संतानों के ऊपर दिवंगत आत्मा के अन्य अहसान ही इतने हैं कि उन्हें अनेक जन्मों तक चुकाना पड़ता हैं, तो भी शायद उनके ऋण से मुक्त होना संभव नहीं हो पाता । इसलिए शास्त्रों में कहा गया हैं कि अगर अपने पूर्वज पितरों को प्रसन्न कर उनके ऋण से मुक्ति के लिए ही साल में सोलह दिनों के लिए पितृपक्ष का पर्व आता हैं, और अगर इसमें उनके निमित्त कुछ क्रिया कर्म किए जाते हैं तो वे प्रसन्न होकर अपनी संतानों की सभी इच्छाएं पूरी कर देते हैं । कहा जाता हैं कि पितृपक्ष में भूतयज्ञ के निमित्त पञ्चबलि के माध्यम से 5 जीवों को श्राद्ध का भोजन कराने का नियम है अगर इनकों भोजन कराया जाता हैं तो पितृ इनके द्वारा खाये अन्न से तृप्त हो जाते हैं । जाने वे कौन से जीव हैं जिन्हें भोजन कराने से पितृ तृप्त हो जाते हैं ।

 

विभिन्न योनियों में संव्याप्त जीव चेतना की तुष्टि हेतु भूतयज्ञ किया जाता है । अलग- अलग पत्तो या एक ही बड़ी पत्तल पर, पाँच स्थानों पर भोज्य पदार्थ रखे जाते हैं । उरद- दाल की टिकिया तथा दही इसके लिए रखा जाता है, और इन्हें पाँच भाग में रखकर इन्हें- गाय, कुत्ता, कौआ, देवता एवं चींटी आदि को दिया जाता हैं ।

 

सबका अलग अलग मंत्र बोलते हुए एक- एक भाग पर अक्षत छोड़कर पंचबलि समर्पित की जाती हैं ।

 

1- गोबलि गाय को खिलाएं भोजन- पवित्रता की प्रतीक गऊ के निमित्त
ॐ सौरभेयः सर्वहिताः, पवित्राः पुण्यराशयः ।।
प्रतिगृह्णन्तु में ग्रासं, गावस्त्रैलोक्यमातरः ॥
इदं गोभ्यः इदं न मम् ।।

 

2- कुक्कुरबलि कुत्ता को खिलाएं भोजन - कत्तर्व्यष्ठा के प्रतीक श्वान के निमित्त-
ॐ द्वौ श्वानौ श्यामशबलौ, वैवस्वतकुलोद्भवौ ।।
ताभ्यामन्नं प्रदास्यामि, स्यातामेतावहिंसकौ ॥
इदं श्वभ्यां इदं न मम ॥

 

3- काकबलि कौआ को खिलाएं भोजन- मलीनता निवारक काक के निमित्त-
ॐ ऐन्द्रवारुणवायव्या, याम्या वै नैऋर्तास्तथा ।।
वायसाः प्रतिगृह्णन्तु, भुमौ पिण्डं मयोज्झतम् ।।
इदं वायसेभ्यः इदं न मम ॥

 

4- देवबलि देवता को खिलाएं भोजन - देवत्व संवधर्क शक्तियों के निमित्त- (यह छोटी कन्या या गाय को खिलाया जा सकता हैं )
ॐ देवाः मनुष्याः पशवो वयांसि, सिद्धाः सयक्षोरगदैत्यसंघाः ।।
प्रेताः पिशाचास्तरवः समस्ता, ये चान्नमिच्छन्ति मया प्रदत्तम् ॥
इदं अन्नं देवादिभ्यः इदं न मम् ।।

 

5- पिपीलिकादिबलि, चींटी को खिलाएं भोजन- श्रमनिष्ठा एवं सामूहिकता की प्रतीक चींटियों के निमित्त-
ॐ पिपीलिकाः कीटपतंगकाद्याः, बुभुक्षिताः कमर्निबन्धबद्धाः ।।
तेषां हि तृप्त्यथर्मिदं मयान्नं, तेभ्यो विसृष्टं सुखिनो भवन्तु ॥
इदं अन्नं पिपीलिकादिभ्यः इदं न मम ।।

 

बाद में गोबलि गऊ को, कुक्कुरबलि श्वान को, काकबलि पक्षियों को, देवबलि कन्या को तथा पिपीलिकादिबलि चींटी आदि को खिला दिया जाए ।।

pitru paksha

from Patrika : India's Leading Hindi News Portal http://bit.ly/2xDQLwg

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