नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हैल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज द्वारा किए गए शोध के अनुसार 4-11 साल के बच्चों में बड़ों की मानसिक बीमारियां जैसे डिप्रेशन, जनरल एंग्जाइटी डिसऑर्डर, ऑब्सेशन कम्पलसिव डिसऑर्डर और बाइपोलर डिसऑर्डर होने लगी हैं ।
ये हैं वजह
इसके लिए काफी हद तक अल्ट्रा मॉडर्न और ‘शिक्षित’ माता-पिता, विज्ञापन और ‘टैलेंट हंट’ जैसे टीवी प्रोग्राम जिम्मेदार हैं । अक्सर माता-पिता अपने बच्चों पर अना वश्यक दबाव डालकर उनसे ‘मैच्योर’ व्यवहार करने की उम्मीद करते हैं। कई विज्ञा पन बच्चों को बड़ों जैसे व्यव हार करने, फैशनेबल कपड़े पहनने व डांस आदि के लिए उकसाते हैं और बच्चे जब ऐसा नहीं कर पाते तो वे उदास रहने लगते हैं, उनका किसी भी काम में मन नहीं लगता और वे चिड़चिड़े हो जाते हैं ।
एक्सपर्ट राय
मनो चिकित्सक डॉक्टर अखिलेश जैन के अनु सार माता-पिता बच्चे को 3 साल की उम्र के बाद ही कोई एक्टिी विटी क्लास जॉइन कराएं ताकि वह कम्यूनिके शन करने के लायक हो जाए। यदि क्लास में उसे चीजें समझ ना आएं, उसका मजाक उड़े या बाकी लोगों के साथ तालमेल ना बने तो वह घर पर साफ-साफ बता सके ।
ऐसा करें
बच्चे को उसकी शारी रिक व मान सिक क्षमता के मुताबिक ही सिखाएं और उससे वैसे ही व्यवहार की उम्मीद करें ।
बच्चे से बड़ों जैसे परफेक्शन वाले व्यवहार की उम्मीद ना करें ।
बच्चे के खेलकूद की सामान्य प्रक्रि या को ‘शरारत’ या समय की बरबादी न मान कर खेलने दें ।
इंग्लिश स्पीकिंग, डांस, ड्रॉइंग, गायन और स्पोट्र्स आदि के लिए बच्चे पर दबाव ना डालें । आपकी जबरदस्ती उसका भविष्य खरा ब कर सक ती है ।
माता-पिता अपनी जिम्मे दारी को समझें और एक्टि विटी क्लास से आने के बाद बच्चे से वहां के बारे में, उसे कैसा लगा, क्या सीखा आदि के बारे में प्यार से पूछें ।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal http://bit.ly/2DFS5oA
No comments:
Post a Comment