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Friday, 21 September 2018

ये तो थायरॉइड के लक्षण हैं!

क्या आजकल आप भुलक्कड़ हो गई हैं? किसी काम में ध्यान नहीं लगा पातीं? अचानक वजन घटने या बढऩे की समस्या से जूझ रही हैं? जरूरत से ज्यादा थकान महसूस हो रही है? तो सावधान हो जाएं और इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें। यह थायरॉइड के संकेत हो सकते हैं।

क्या है थायरॉइड?

हमारे गले में अखरोट के आकार की थायरॉइड ग्रंथि होती है जो दो तरह के थायरॉइड हार्मोन टी3 और टी4 बनाती है। यह शरीर की सबसे जरूरी ग्रंथि है जो कई चीजों को नियंत्रित करती है जैसे नींद, पाचन तंत्र, मेटाबॉलिज्म, लिवर की कार्यप्रणाली और शरीर का तापमान आदि। आप थायरॉइड ग्रंथि को शरीर का सेंट्रल कंट्रोलर मान सकते हैं।

यह दो प्रकार का होता है- हाइपोथायरॉइडिज्म और हाइपरथायरॉइडिज्म। हाइपो में वजन बढऩे लगता है और भूख कम लगती है। हाथ पांव में सूजन आ जाती है। सुस्ती और ठंड लगने से व्यक्ति परेशान रहता है। माहवारी में गड़बड़ी और याददाश्त में कमी हो जाती है।

हाइपरथायरॉइडिज्म में मरीज का वजन कम हो जाता है और उसे बार-बार भूख लगती है। तनाव, ध्यान केंद्रित न कर पाने, तेज या धीमी धडक़न और ब्लड प्रेशर की समस्या, वजन का तेजी से गिरना या बढऩा, गले में सूजन, ज्यादा पसीना आना, माहवारी की अनियमितता, नींद में कमी, थकान को मिटाने के लिए बार-बार कुछ खाने की इच्छा, गैस्ट्रिक अल्सर, बार-बार यूरिन की समस्या जैसे लक्षण होते हैं। शरीर की कुछ कोशिकाएं अपने आप ही थायरॉइड कोशिकाओं को खत्म करना शुरू कर देती हैं। इसे ऑटो इम्यून बीमारी कह सकते हैं। पहले भी यह समस्या लोगों में होती थी लेकिन आधुनिकता के चलते बिगड़ी जीवनशैली से यह बीमारी ज्यादा देखने में आ रही है।

सावधानी जरूरी

थायरॉइड की समस्या ज्यादातर महिलाओं में देखने को मिलती है। इंडियन थायरॉइड सोसाइटी के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 4.2 करोड़ से ज्यादा लोग थायरॉइड के मरीज हैं जिनमें 60 प्रतिशत महिलाएं हैं।
थायरॉइड की दवाएं शरीर को नुकसान कम और फायदा ज्यादा पहुंचाती हैं। इनसे मोटापा व थकान जैसे लक्षण नियंत्रित होने लगते हैं।

मरीज को थायरॉइड की दवाएं निरंतर और ताउम्र खानी पड़ती है लेकिन कुछ मामलों में यह दवा छूट भी जाती है।

दवाएं किस तरह और कब लेनी है? यह डॉक्टर ही तय करता है। इसलिए जरूरी है कि डॉक्टर के निर्देशानुसार ही दवाओं को प्रयोग में लें।
यदि महिला को पहले से ही थायरॉइड की समस्या है तो स्त्री रोग विशेषज्ञ को इसकी जानकारी जरूर दें। इससे जुड़ी सावधानियों और दवाओं के बारे में वे बताएंगी। जब तक थायरॉइड नियंत्रित नहीं हो जाता, तब तक गर्भधारण से बचने के लिए चिकित्सकीय सलाह भी दी जाती है।

इस रोग से शरीर को नुकसान

हड्डियां कमजोर पडऩे लगती हैं। थायरॉइड के मरीज को ऑस्टियोपोरोसिस अटैक की आशंका हो सकती है। पैरों में दर्द और वाटर रिटेंशन (ऊत्तकों के भीतर तरल पदार्थ की कमी) की समस्या भी थायरॉइड से जुड़ी है।

थायरॉइड ग्रंथि में गड़बड़ी से हार्मोंस में असंतुलन होता है। इससे हृदय संबंधी रोग से लेकर इंफर्टिलिटी की भी समस्या हो सकती है। थायरॉइड कैंसर भी इसी असंतुलन के कारण होता है। गले में दर्द, सूजन और भारीपन इसके लक्षण हैं। आयोडीन की कमी के अलावा खानपान पर ध्यान नहीं देने और जरूरत से ज्यादा तनाव से थायरॉइड की समस्या बढ़ सकती है।

हाइपोथायरॉइडिज्म प्रेग्नेंसी में काफी परेशानियों को बढ़ा देता है। यह गर्भ में पल रहे शिशु के विकास और उसके मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए जब भी प्रेग्नेंसी के लिए प्लान करें तो अपना थायरॉइड टेस्ट जरूर कराएं।

अगर मरीज को यहां बताए गए लक्षणों के अनुसार समस्या है तो विशेषज्ञ को दिखाकर उनके बताए अनुसार दवाइयां एवं आवश्यक जांचें कराएं। थायरॉइड लाइलाज रोग नहीं है, जीवनशैली सुधारकर, तनाव से दूर रहकर और उचित उपचार से इस पर नियंत्रण किया जा सकता है।



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