जानिए सांस लेने का क्या है सही तरीका - My Breaking News

Breaking

Home Top Ad

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Tuesday, 23 October 2018

जानिए सांस लेने का क्या है सही तरीका

अाप ये जानकर हैरत में पड़ जाएंगे कि हम लोग सही तरीके से सांस भी लेना नहीं जानते। रोजाना 20,000बार जो काम हम करते हैं उसे भी सही ढंग से करने के लिए हमें ट्रेनिंग की जरूरत है। दिलचस्प बात यह है कि छोटे बच्चे इस काम में माहिर होते हैं। सोते समय उनके पेट का उठना, गिरना इस बात का संकेत है कि वे अपनी हेल्थ के लिए अपने डायफ्राम्स से गहरी और सही तरीके से सांस ले रहे हैं। आइए जानते हैं सांस लेने के सही तरीके के बारे में...

जैसे-जैसे हम बड़े होने लगते हैं, वैसे-वैसे हमारी सांसें तेज चलने लगती हैं और हमारी कोशिकाओं तक ढंग से ऑक्सीजन नहीं पहुंचती जिससे स्ट्रेट-रेस्पॉन्स सिस्टम भी ज्यादा सक्रिय हो जाता है। नतीजतन हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है और तरह-तरह के रोग हमें घेरने लगते हैं।

बरतें सावधानी

ओन्टारियो लंग एसोसिएशन (कनाडा) के रेस्पीरेटरी हेल्थ प्रोग्राम के निदेशक कैरोल मेडली का कहना है कि नियमित व्यायाम हेल्दी डाइट और इंफेक्शन से दूर रहकर हम अपने फेफड़ों की सेहत को काफी दुरुस्त कर सकते हैं और प्रदूषण के प्रभावों से भी दूर रह सकते हैं। अपने श्वास तंत्र को मजबूत करने के लिए इन बातों पर ध्यान दें -

ऐसा न करें
स्मोकिंग करना या स्मोकिंग करने वालों के साथ रहना।
लकड़ी के धुएं के पास खड़ा रहना या कार का इंजन बेवजह चालू रखकर उसमें बैठना।
ज्यादा केमिकल युक्त क्लीनर इस्तेमाल करना।
प्रदूषित हवा में एक्सरसाइज करना।

ऐसा करें
हाथ ठीक से धोएं ताकि सर्दी-जुकाम से बचे रहें।
नियमित व्यायाम और योग करें।
घर की धूल-मिट्टी साफ करने के लिए डस्टर की बजाय गीला कपड़ा इस्तेमाल करें।
घर को धूल -मिट्टी से बचाने के लिए जाली या एग्जॉस्ट फैन का प्रयोग करें।

जान लें ब्रीदिंग तकनीक
दरअसल हम सांस लेने के काम को महत्व नहीं देते और जब तक कोई समस्या उत्पन्न न हो जाए, तब तक इस पर गौर भी नहीं करते। प्राणायाम करने वाले अपनी ब्रीदिंग तकनीक पर काबू पाकर अपने शरीर को साध सकते हैं। ओलम्पिक तैराक, प्रतियोगी ब्रीद होल्डर और ओपेरा सिंगर भी अपनी सांसों पर नियंत्रण करना और उन्हें अपने फायदे के लिए संचालित करना सीख जाते हैं। 'हमें भी ब्रीदिंग तकनीकों का प्रशिक्षण लेकर अपने तन और मन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की पहल करनी चाहिए। 80 फीसदी बीमारियां स्ट्रेस की वजह से होती हैं। अगर हम अपने आंतरिक पार्ट्स को ब्रीदिंग के माध्यम से रेगुलेट करना सीख जाएं, तो शरीर का हर हिस्सा सही ढंग से काम करेगा।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal http://bit.ly/2Cz5lcE

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages