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Wednesday, 3 October 2018

इसे खाने से आप बन जाएंगे ताकतवर

आमतौर पर माना जाता है कि नॉन-वेज डाइट (मांसाहारी भोजन) वेजीटेरियन डाइट से कहीं अच्छी होती है। खासतौर से, पोषक तत्व के संदर्भ में भी यही धारणा लोगों के मन में सालों से है। लेकिन वास्तविकता इससे कहीं भिन्न है। वेजीटेरियन डाइट भले ही लोगों को उबाऊ लगे लेकिन यह आपको हेल्दी बनाकर रखती है।

प्रोटीन
प्रोटीन जहां एक ओर आपकी मसल्स बनाने का काम करता है, वहीं दूसरी ओर यह चर्बी घटाने में भी मददगार है। एक आम आदमी को हेल्दी रहने के लिए प्रतिदिन तकरीबन 60 से 80 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। नॉन-वेजीटेरियन डाइट में भले ही प्रोटीन की प्रचुरता होती है, लेकिन ऐसी बहुत सी वेजीटेरियन डाइट हैं, जिनमें मीट आदि से भी ज्यादा प्रोटीन होता है। मसलन, जहां 100 ग्राम साल्मन मछली में करीबन 26 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। वहीं 100 ग्राम चीज में 32 ग्राम प्रोटीन होता है। इसी तरह 100 ग्राम चिकन ब्रेस्ट में जहां 30 ग्राम प्रोटीन होता है, वहीं 100 ग्राम नट्स व सीड्स के सेवन से 33 ग्राम प्रोटीन मिलता है। टोफू, सोयाबीन, दही, दूध, राजमा, बादाम, एवोकाडो भी कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जिनमें इसकी पर्याप्त मात्रा है।

मिनरल्स
शरीर को सोडियम, जिंक, आयरन, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम व फास्फोरस की बेहद आवश्यकता होती है। प्लांट बेस डाइट में मिनरल्स व विटामिन्स काफी मात्रा में पाए जाते हैं लेकिन नॉन वेज आहार में इस तरह के मिनरल्स की मात्रा कम ही होती है। सब्जियों के बीज में जिंक काफी मात्रा में पाया जाता है। खासतौर से, स्कवैश, कद्दू और तिल के बीजों के तीस ग्राम सेवन से पुरूष की प्रतिदिन की आवश्यकता की 31 प्रतिशत व महिला की 43 प्रतिशत जरूरत पूरी होती है। नट्स, चीज, दूध, ***** ग्रेन्स जैसे गेंहू, क्विनोआ, चावल आदि में भी जिंक पाया जाता है। वहीं लोग सोचते हैं कि वेजीटेरियन डाइट में विटामिन बी12 नहीं पाया जाता, जबकि सोया मिल्क, फोर्टिफाइड सेरल्स में विटामिन बी12 पर्याप्त मात्रा में होता है।

फैट्स
हेल्दी रहने के लिए शरीर को फैट्स की बेहद आवश्यकता होती है। यह फैट न केवल शरीर को फैटी एसिड प्रदान करते हैं, बल्कि शरीर में विटामिन को अब्जॉर्ब करने में मदद करते हैं। नट्स, ऑयल और एवोकाडो में गुड फैट्स पाया जाता है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड
ओमेगा-3 फैटी एसिड ब्रेन अच्छे स्वास्थ्य व हृदय के कार्य संचालन के लिए जरूरी है। हमारा शरीर स्वयं ओमेगा-3 फैटी एसिड स्वयं नहीं बना सकता, इसलिए इसे डाइट में शामिल करना जरूरी है। यूं तो नॉन-वेज में ओमेगा-3 फैटी एसिड काफी मात्रा में पाया जाता है, पर शाकाहारी व्यक्ति भी डेली डाइट में चिया बीज, टोफू, फलेक्स सीड्स, अखरोट शामिल कर इसकी कमी पूरी कर सकते हैं। रोज की ओमेगा-3 फैटी एसिड की जरूरत पूरी करने के लिए 30 ग्राम अखरोट का सेवन करें। दो टेबलस्पून अखरोट और एक टेबलस्पून फलेक्स बीज में पर्याप्त ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है। इसके लिए आपको मछली का सेवन करने की जरूरत नहीं है।

यह भी जानें
वेजीटेरियन डाइट कई मायनों में नॉन-वेज डाइट से बेहतर मानी गई है। वेजीटेरियन डाइट में फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स पाए जाते हैं। जबकि सेचुरेटेड फैट्स की मात्रा इनमें कम होती है। जिसके चलते ब्लड प्रेशर, कोलेस्टॉल, हार्ट डिसीज व स्टोक की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। वहीं वेजीटेरियन डाइट में मौजूद फाइबर उच्च होता है, वहीं नॉन-वेज डाइट में फाइबर बेहद कम होता है। फाइबर डाइजेशन के लिए काफी अच्छा माना जाता है। प्लांट बेस डाइट लेने से व्यक्ति का डाइजेस्टिव सिस्टम सही तरह से काम करता है। वेजीटेरियन फूड जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, नट्स व हब्र्स आदि में एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं। यह एंटी-ऑक्सीडेंट्स शरीर को कई तरह की बीमारियों व डिसऑर्डर से बचाने का काम करते हैं। वहीं दूसरी ओर रेड मीट व चिकन शरीर में टॉक्सिन को बढ़ाता है। नॉन-वेज डाइट की सबसे बड़ी खामी यह होती है कि मांसाहारी भोजन कार्सिनोजन्स होता है। कार्सिनोजन्स अगर मनुष्य के शरीर में जमा होने लग जाए तो इससे कैंसर व अन्य कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।



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