शरद पूर्णिमा की रात को चन्द्रमा की किरणों से अमृत झरता है, इस रात को आयुर्वेद में वर्णित विभिन्न औषधियां चन्द्रमा की रोशनी से ही दिव्यता का बल प्राप्त करती हैं । जो कोई भी शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा की रौशनी में स्वयं स्नान करके चावल की खीर को ग्रहण करता है । उसके शरीर के अनेक रोगों का नाश हो जाता हैं ।
चन्द्रमा की रोशनी में खीर बना के ठण्डी कर लें और उसे इस तरह रखें क़ि चन्द्रमा की रौशनि उस पर बराबार पड़ती रहे । अगर घर में चांदी या स्टील के बर्तन हो तो उक्त खीर को उन्हीं में रखें । स्टील के बर्तन में खीर रखकर उसमे चांदी की चम्मच या चांदी की साफ़ धुली अंगूठी भी डाल कर रख सकते हैं । अगर किसी के पास छोटा चांदी का बर्तन हो वो उस बर्तन में कच्चा गाय का दूध भरकर उसका अर्घ्य/चढ़ा दें । सौभाग्य की वृद्धि होती है ।
अगर हो सके तो शरद पूर्णिमा की रात्रि में 11 बजकर 30 मिनट से 12 बजकर 30 तक आकाश में चमकते दिव्य चन्द्रमा को खुली आँखों से देखते हुए चन्द्रमा में अपने ईष्ट देव आराध्य का ध्यान करने से भटकते हुए मन को शांति और सही दिशा धारा प्राप्त होता । अगर किसी को चश्मा भी लगता हो तो भी खुली आँखों से ही चन्द्रमा को देखें और अपने नेत्र की नसों के माध्यम से चन्द्र की रौशनि को आँखों और मष्तिष्क तक पहुंचने देंवे । लगभग 15 से 20 मिनट के अंदर ही ईष्ट देव का चेहरा हमारा मष्तिष्क कल्पनाओ के और ध्यान के तीव्र स्पंदन में दिखाने लगता है । चन्द्रमा में ही कल्पना शक्ति और ध्यान की एकाग्रता में ब्लैक एन्ड व्हाईट चांदी सा चमकता हुआ अपने ईष्ट आराध्य के दर्शन किये जा सकते हैं । करवा चौथ 23 अक्टूबर 2018 मंगलवार को हैं ।
इसके बाद चांद की रोशनी में रखी हुई उस चावल की खीर को ग्रहण करलें । इसे खाने से अनेक असाध्य रोगों का नास कुछ ही दिनों में स्वतः ही हो जाता हैं ।
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