लिवर शरीर के सारे पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और मिनरल्स आदि को पचाकर आंतों में भेजने का काम करता है। यह विषैले पदार्थों को दूर कर शरीर के सतत संचालन के लिए जरूरी है। अगर इसमें गड़बड़ी हो जाए तो सांस की नली के साथ-साथ पाचनतंत्र भी प्रभावित होने लगता है। जानते हैं शरीर की इस कैमिकल फैक्ट्री से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को।
जवाब देने लगता है
शराब, वायरल इंफेक्शन, किसी भी प्रकार के नशे की लत, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल की अधिकता और खराब लाइफस्टाइल से लोगों में लिवर संबंधी रोगों का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में वजन कम होना, कोलेस्ट्रॉल की अधिकता, भूख न लगना, पेट पर सूजन, पीलिया, पेटदर्द, थकान और पेशाब के रंग में बदलाव जैसे लक्षण होने पर लिवर जवाब देने लगता है।
ये होते हैं प्रभावित
कम रोग प्रतिरोधक क्षमता, शराब या नशा करने वाले और अन्य किसी बीमारी से पीडि़त व्यक्ति लिवर के रोग से प्रभावित हो सकते हैं।
इस अंग को है पसंद
नींबू, हल्दी, अदरक, दालचीनी, हरी पत्तेदार सब्जियां, स्ट्रॉबेरी, रसबेरी व नाशपाती जैसी विटामिन और मिनरल से भरपूर चीजें खाने से लिवर दुरुस्त रहता है।
बच्चों में फैटी लिवर
ब च्चों में फैटी लिवर का प्रमुख कारण है मोटापा। यह जंकफूड व तला-भुना खाने, व्यायाम न करने और ज्यादा टीवी देखने से होता है। हेपेटाइटिस-बी का संक्रमण मां से बच्चे को या दूषित रक्त व सुई से होता है। बचाव के लिए नवजात को जन्म के तुरंत बाद, डेढ़ और छह माह की उम्र में हेपेटाइटिस-बी का टीका लगवाया जाना चाहिए। दूषित खानपान से बड़े बच्चों में हेपेटाइटिस-ए और ई से लिवर में संक्रमण होता है। हल्का बुखार, जी घबराना, आंखों व पेशाब में पीलापन इसके प्रमुख लक्षण हैं। इससे बचाव के लिए बच्चों को एक व डेढ़ साल की उम्र में हेपेटाटिस-ए का टीका लगाएं। डॉ. दीपक शिवपुरी,
खुद ही कर लेता है रिपेयरिंग
लिवर को हम अंग और ग्रंथि दोनों कह सकते हैं। यह शरीर की 500 से अधिक महत्वपूर्ण गतिविधियों में भाग लेता है। डेढ़ किलो का लिवर पेट के दाईं ओर स्थित होता है।
यह अपने भीतर ऊर्जा
को बचाए रखता है। रक्तकोशिकाओं का निर्माण भी यहीं होता है। यहां शुगर (कार्बोहाइड्रेट्स, ग्लूकोज, फैट्स) का जमावड़ा होता है जिससे यह बैट्री की तरह काम करता है।
यह प्रोटीन के संग्रहण का काम करता है। दुर्घटना या चोट की स्थिति में लिवर खून को जमाता है ताकि अधिक रक्तबहने से शरीर में कमजोरी न आए।
रोजाना २४ घंटे काम करने वाला लिवर वैक्यूम क्लीनर की तरह रक्तसे दूषित पदार्थों को दूर करता है। एक फैक्ट्री की तरह यह पाचक रस का निर्माण करता है जिसे बाइल कहते हैं। मजबूत मासंपेशियों के लिए यह उचित मात्रा में अमिनो एसिड का निर्माण करता है।
इसे आम बोलचाल की भाषा में यकृत या जिगर भी कहते हैं।
यह शरीर का इकलौता ऐसा अंग है जो खुद की रिपेयरिंग कर लेता है लेकिन अगर यह ज्यादा प्रभावित हो जाए तो भरपाई करना असंभव हो जाता है।
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