हमारे देश में हर तीन में से एक व्यक्ति सोशल फोबिया का शिकार है। सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर के रोगी यह मानते हैं कि हर कोई उन्हें धोखा देगा, मजाक उड़ाएगा। इस फोबिया का उचित इलाज न करवाएं तो व्यक्ति की कार्यक्षमता घट जाती है और सामाजिक रिश्ते बिगड़ जाते हैं। जानते हैं इसके बारे में:-
बायोलॉजिकल :
ब्रेन में एक रिस्पॉन्स सेंटर होता है जो 'फाइट या फ्लाइट' के संकेत देता है। ब्रेन सर्किट्स के असामान्य होने से यह संकेत नहीं मिलता। यह वंशानुगत रोग है।
मनोवैज्ञानिक : अतीत के बुरे अनुभव से भी यह रोग होता है।
पर्यावरणीय : आपके समक्ष कोई दूसरे को जलील करे, उसका मजाक उड़ाए तो आप खुद को उस हालत में महसूस करने लगते हैं। जिन बच्चोंं को उनके माता-पिता ज्यादा संरक्षण, दबाव में रखते हैं, वे भी अक्सर सोशल फोबिया के शिकार हो जाते हैं।
लक्षण : घबराहट, आंख मिलाकर बात न करना, धड़कन बढऩा,बेचैनी व सांसें तेज होना, चक्कर, पसीना आना, पेटदर्द, ब्लड प्रेशर बढ़ना या घटना, सिरदर्द, दूसरों के साथ खानपान या काम ना करना आदि।
इलाज : इस रोग का सबसे प्रभावी उपचार 'बिहेवियरल (व्यवहार संबंधी) थैरेपी' है। इसके तहत रोगी को सलाह दी जाती है कि वह परिस्थिति का अलग ढंग से सामना करें। बेवजह के डर से बचें और सकारात्मक सोच को अपनाएं।
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