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Tuesday, 19 March 2019

यहां रंग बिरंगे रंगों से नहीं.. मुर्दो की भस्म से खेली जाती हैं होली, पापों से मुक्ति ही नहीं हर मनोकामना भी होती हैं पूरी

होली के दिन देश दुनिया में लोग रंग बिरंगे रंगों से होली खेलते हैं लेकिन हिन्दूस्तान में एक जगह ऐसी भी जगह भी हैं जहां लोग होली के दिन मूर्दों को जलाने के बाद जो राख भस्म होती है उससे होली खेलने में सौभाग्य मानते हैं । जी हां काशी के महाश्मशान पर जलती चिताओं के बीच चिता की भस्म से होली खेलते है । इस साल 2019 में होली का पर्व 20 मार्च बुधवार को होलिका दहन होगी एवं 21 मार्च गुरुवार को होली खेली जायेगी ।

 

एक ओर होली के दिन जहां पूरा देश रंग और गुलाल से सराबोर होता है वहीं बाबा विश्वनाथ की नगर काशी बनारस में रंगों से नहीं शमशान की राख से होली खेली जाती है । बनारस के मणिकर्णिका घाट पर भगवान शिव के भक्त श्मशान की राख से होली खेलते हैं इस दौरान वो एक दूसरे पर चिता की राख फेंकते हैं, जिसे चिता भस्म की होली कहा जाता है । कहा जाता है कि मां पार्वती के लौट आने पर भगवान शिव ने चिता की राख के साथ होली खेली थी, तभी से भगवान शिव के अनन्य भक्त चिता की राख से होली खेलते हैं ।

 

होली के दिन चिता भस्म होली की शुरूआत श्मशान घाट का देवता महाशमशानाथ की प्रार्थना से शुरू होती है, और भक्त ढोल नगाड़ों के साथ श्मशान घाट की राख से होली खेलते हैं। इस अनोखी होली को देखने के लिए देश-विदेश श्रद्धालु काशी में आते हैं । ऐसी मान्यता है कि इस होली को खेलने से महादेव शिव की कृपा से मनुष्यों के जन्म जन्मांतरों के पापों से मुक्ति मिल जाती एवं अनेक भौतिक, आध्यात्मिक मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं ।



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