नवजात शिशुओं में दिल के रोग अधिकतर जन्म से होते हैं। इसकी मुख्य वजह महिलाओं की कम उम्र में शादी, शराब व धूम्रपान की लत और खराब जीवनशैली हैं।आइए जानते हैं बच्चाें में हृदय राेग के बारे में :-
यह रोग किस रूप में सामने आते हैं?
हृदय संबंधी रोगों में बच्चों के दिल में छेद के मामले ज्यादा सामने आते हैं। कुछ मामलों में हृदय गति सामान्य न होने जैसी दिक्कत भी हो सकती है।
बच्चों में इन रोगों का पता कब चलता है?
बच्चे के जन्म के बाद से ही उसे बार-बार खांसी जुकाम होना, सांस लेने में दिक्कत, दूध न पीना, वजन न बढ़ना, जीभ व नाखूनों में नीलापन आदि के रूप में लक्षण सामने आने लगते हैं।
माता-पिता कैसे सतर्क रहें?
उक्त लक्षण दिखते हैं तो पहले शिशु रोग विशेषज्ञ की सलाह लें। शिशु रोग विशेषज्ञ को यदि हृदय संबंधी कोई आशंका होती है तो वे इसके लिए एक्स-रे, ईसीजी व टू-डी इंफो कार्डियोग्राफी जैसी जांचें करवाते हैं। जरूरत पड़ने पर मरीज को हृदय रोग विशेषज्ञ के पास रेफर करते हैं।
इन रोगों का इलाज क्या है?
हृदय में छेद होने पर उसकी सर्जरी की जाती है। बच्चे में हृदय गति सामान्य न होने की परेशानी है तो उसे पेसमेकर लगाते हैं।
एक बार ठीक होने के बाद क्या दोबारा होने का खतरा रहता है?
सर्जरी के बाद ऐसा खतरा नहीं होता। इसके बाद बच्चा सामान्य जीवन गुजार सकता है।
इससे बचने के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
गर्भधारण के दौरान महिलाएं खानपान व जीवनशैली का विशेष खयाल रखें। बच्चे को इस तरह की कोई परेशानी हो तो चिकित्सक को दिखाएं
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