रोजाना चिड़चिड़े, उदास या तनाव में रहते हैं और हार्मोंस संबंधी समस्या भी है तो ऐसे में विपरीतकरणी मुद्रासन लाभकारी हो सकता है। आइए जानते हैं इसके बारे में।
लाभ : यह आसन निम्न रक्तचाप, पैरों में सूजन, नाड़ी के रोग, ग्रंथि की सक्रियता में कमी, पेट व किडनी संबंधी रोगों में आराम पहुंचाकर ऊर्जा और रक्त संचार को बढ़ाता है।
ऐसे करें : पीठ के बल सीधे लेटें। दोनों हाथों को सीधा रखें। सांस लेते हुए घुटनों को ऊपर की ओर मोड़ें। दोनों हाथों को कूल्हों के नीचे लाएं व कोहनी को फर्श पर टिका कर रखें। अब हाथों की सहायता से पैरों को ऊपर की तरफ सीधा उठाएं। सामान्य सांस लेते हुए क्षमतानुसार रुकें। सांस छोड़ते हुए घुटनों को माथे की ओर मोड़ें व धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में आ जाएं। इसे 2-3 बार दोहराएं।
सावधानी : 14 साल से कम उम्र के बच्चे ये अभ्यास न करें। इसे सुबह खाली पेट करें।
ध्यान रहे : उच्च रक्तचाप, चक्कर आने व रीढ़ की हड्डी में तकलीफ होने पर इसका अभ्यास न करें।
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