'बॉर्डर' और 'एलओसी कारगिल' फिल्मों में काम कर चुके अभिनेता सुदेश बेरी का कहना है कि युद्ध आधारित फिल्मों में प्रमुखता से हत्याओं को नहीं, बल्कि देशभक्ति को दिखाया जाना चाहिए। युद्ध आधारित फिल्में बॉलीवुड के लिए नई नहीं हैं। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध (1999) और 1971 के युद्ध जैसे कई वास्तविक युद्धों ने भारतीय फिल्म निर्माताओं को फिल्में बनाने के लिए प्रेरित किया है।
वर्तमान चलन के बारे में पूछने पर सुदेश ने एक इंटरव्यू में बताया, 'अगर आप किसी फिल्म के माध्यम से लोगों में देशभक्ति जगाते हैं, तो इसमें कोई समस्या नहीं है। युद्ध आधारित फिल्मों में हत्याओं को बहुत दिखाया जाता है। इसकी जगह देशभक्ति होनी चाहिए।' साथ ही उन्होंने कहा, '(युद्ध आधारित फिल्म में) युद्ध में हत्या बहुत आसान है, यह समाज को साफ करने वाला होना चाहिए। यह ऐसा होना चाहिए कि लोग कहें, 'देखो, ये लोग मर रहे हैं और इन्हें ऐसे नहीं मरना चाहिए।'
'बॉर्डर हिंदुस्तान का' के अभिनेता ऐसी फिल्मों का निर्देशन करना चाहते हैं जो दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ-साथ उन्हें शिक्षित भी करें। उन्होंने कहा, 'मैं फिल्मों का निर्माण और निर्देशन करना चाहता हूं। चाहे वह विज्ञान आधारित हो या ऐतिहासिक लेकिन वह दर्शकों को कुछ जानकारी देगी। उन्हें उससे कुछ सीखना चाहिए और मनोरंजन भी होना चाहिए।' फिल्म उद्योग में लगभग तीन दशकों से काम कर रहे अभिनेता वर्तमान में 'शक्ति-अस्तित्व के अहसास की' और 'मुस्कान' में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैं अभिनय करने के लिए पैदा हुआ हूं। यही मेरा धर्म है - अभिनय, पर्दे पर प्रस्तुति। मैं दिल से अभिनय करता हूं।'
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