कई बार हम मसालों में मौजूद तत्वों को नष्ट कर काम में लेते हैं, जिसके बारे में हमें पता ही नहीं होता। जानते हैं इनके प्रयोग की सही विधि के बारे में।
हींग : सब्जी बनाने के बाद इसे पानी में मिलाकर ऊपर से डालें। 10 मिनट के लिए इसे ढककर रख दें। कैल्शियम से समृद्ध हींग कब्ज, गैस, माइग्रेन व दमा में लाभकारी है।
धनिया : पिसा धनिया तब डालें जब सब्जी डाल चुके हों या इसे सब्जी के साथ डाल दें। फिर थोड़ा हल्का भूने और पानी डालें। धनिया उच्च पोटेशियम व आयोडीन का स्रोत है जो थायरॉइड व खून का थक्का बनाने में सहायक है।
जीरा : यह ऐसा मसाला है जिसे हल्का भुनने के बाद भी इसमें करीब 30-40 प्रतिशत गुण मौजूद रहते हैं। जीरा भुनने के बाद अधिक गुणकारी होता है। इसे हल्का भूनकर ऊपर से सब्जी डाल दें। यह गर्भवती स्त्री व दांत निकलने वाले बच्चों को देना सर्वोत्तम है।
सौंफ : इसका प्रयोग कच्ची अवस्था में करना उचित होता है। सब्जी बनने के बाद ऊपर से डालना या खाना खाने के बाद चबाना बेहतर है। यह बच्चों में पेट की समस्याओं को दूर करती है। पानी में उबालकर बच्चों को ग्राइप वाटर के रूप में दें।
दालचीनी : पिसी दालचीनी को उबलती हुई सब्जी में डालें। जुकाम व पाचन में लाभ होगा।
लौंग : इसका प्रयोग उबलती सब्जी, पानी, चाय, कॉफी या काढ़े में करना बेहतर है। यह अस्थमा, खांसी, अपच, गैस व जोड़ों के दर्द में लाभकारी है।
दानामेथी : यह आयरन, क्लोरीन व सल्फर से समृद्ध है। जो खून की कमी, गैस, एसिडिटी व कब्ज में लाभकारी है। इसका प्रयोग सब्जी डालते समय करें ताकि इसे फूलने के लिए समय मिल सके।
लालमिर्च : खाना खाते समय इसका प्रयोग हल्की मात्रा में ऊपर से बुरक कर करें। यह शरीर से कीटाणुओं का सफाया करती है।
अमचूर : जब सब्जी या खाद्य पदार्थ उबल रहा हो तो इसका उपयोग करें। इससे दांत मजबूत व त्वचा सुंदर बनती है।
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