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Sunday, 23 September 2018

हाथों में झनझनाहट या सूनापन तो हो सकता है कार्पल टनल सिंड्रोम!

आजकल लोगों में हाथ व कलाई का दर्द एक आम बीमारी बनता जा रहा है। मेडिकल की भाषा में इसे कार्पल टनल सिंड्रोम कहते हैं। इस रोग में जब अन्य कोशिकाएं जैसे कि लिगामेंट्स और टेंडन सूज या फूल जाते हैं तो इसका प्रभाव मध्य कोशिकाओं पर पड़ता है। इस दबाव से हाथ घायल या सुन्न महसूस करता है।

कार्पल टनल हड्डियों और कलाई की अन्य कोशिकाओं द्वारा बनाई गई एक संकरी नली होती है। यह नली हमारी मध्य नाड़ी की सुरक्षा करती है। मध्य नाड़ी हमारे अंगूठे, मध्य और रिंग अंगुलियों से जुड़ी होती है। साधारणतया कार्पल टनल सिंड्रोम ज्यादा गंभीर बीमारी नहीं है। इलाज से यह रोग दूर हो जाता है।

ये हैं कारण
एक ही हाथ से लगातार काम करने से कार्पल टनल सिंड्रोम की परेशानी हो सकती है। यह सामान्यतया उन लोगों में अधिकतर पाया जाता है जिनके पेशे में कलाई को मोडऩे के साथ पिंचिंग या ग्रीपिंग करने की जरूरत होती है। पुरुषों की तुलना में औरतों को इसका तिगुना खतरा रहता है। औरतों में यह सामान्यतौर पर गर्भावस्था के दौरान, मेनोपोज और वजन बढऩे के कारण भी होता है।

इसमें वे लोग भी शामिल हैं जो कम्प्यूटर पर कार्य करते हैं। इसके अलावा कारपेन्टर, मजदूर, संगीतकार, मैकेनिक, बागवानी करने वाले, सुई का इस्तेमाल करते हुए कई घंटों तक काम करने, गोल्फ खेलने और नाव चलाने का शौक रखने वाले भी कार्पल टनल सिंड्रोम का शिकार हो सकते हैं। यह सिंड्रोम कुछ बीमारियों से भी संबंधित होता है जैसे मधुमेह, आर्थराइटिस या थायरॉइड आदि।

रोगी की पहचान ऐसे करें
यह रोग सबसे पहले इंडेक्स (तर्जनी) या मिडिल फिंगर (मध्यमा) को प्रभावित करता है। जिसमें इन अंगुलियों में जलन होने लगती है।
धीरे-धीरे यह समस्या दर्द में बदल जाती है और फिर यह दर्द अंगुलियों से कलाई और कंधों तक पहुंच जाता है।
दिन की तुलना में रात के समय यह समस्या ज्यादा परेशान करती है।
कोई भी वस्तु उठाते समय अधिक परेशानी होना।
अंगूठे में कमजोरी महसूस करना।

ये हैं समाधान
यदि यह रोग किसी बीमारी की वजह से है तो डॉक्टर सबसे पहले उस समस्या का इलाज करते हैं। फिर वह कलाई को आराम देने के लिए हाथों के सही मूवमेंट की सलाह देते हैं। कलाई में स्प्लिंट बांधने को भी कहा जा सकता है। कलाई पर बर्फ रखकर सेंक कर सकते है। डॉक्टर द्वारा बताई गई स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज से भी लाभ होता है।



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