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Friday, 8 March 2019

फुलैरा दूज 8 मार्च 2019, होली से जुड़े इस खास त्यौहार पर ऐसे बरसती है राधे कृष्ण की कृपा

फुलैरा दूज होली के त्यौहार से जुड़ा एक बहुत ही खास त्यौहार माना जाता है जो फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वतीया तिथि को मनाया जाता है । इस दिन वृंदावन और मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों में विशेष अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है । इस दिन फूलों की छोटी सी होली भी खेली जाती हैं । साल 2019 में यह पर्व 8 मार्च 2019 को है । जाने आखिर इस दिन कैसे श्रीकृष्ण और राधा रानी की कृपा बरसती हैं ।


ज्योतिष के जानकारों के अनुसार इस दिन कोई नया काम शुरू करने के लिए फुलेरा दूज का दिन सबसे उत्तम माना जाता हैं । माना जाता है कि इस दिन में साक्षात श्रीकृष्ण का अंश होता है, तो जो भक्त प्रेम और श्रद्धा से राधा-कृष्ण की उपासना करते हैं, श्रीकृष्ण उनके जीवन में प्रेम और खुशियां बरसाते हैं । कृष्ण भक्त इस दिन को बड़े उत्साह से मनाते हैं । राधे-कृष्ण को गुलाल लगाते हैं । भोग, भजन-कीर्तन करते हैं क्योंकि फुलेरा दूज का दिन कृष्ण से प्रेम को जताने का दिन है । इस दिन भक्त कान्हा पर जितना प्रेम बरसाते हैं, उतना ही प्रेम कान्हा भी अपने भक्तों पर लुटाते हैं ।


फुलेरा दूज पर राधे-कृष्ण की उपासना आपके जीवन को सुंदर और प्रेमपूर्ण बना सकती है । इसे फूलों का त्योहार भी कहते हैं क्योंकि फाल्गुन महीने में कई तरह के सुंदर और रंगबिरंगे फूलों का आगमन होता है और इन्हीं फूलों से राधे-कृष्ण का श्रृंगार किया जाता है ।

 

फुलेरा दूज का महत्व
- फुलेरा दूज मुख्य रूप से बसंत ऋतु से जुड़ा त्योहार है ।
- वैवाहिक जीवन और प्रेम संबंधों को अच्छा बनाने के लिए इसे मनाया जाता है ।
- फुलेरा दूज वर्ष का अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है, इस दिन कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं ।
- फुलेरा दूज में मुख्य रूप से श्री राधा-कृष्ण की पूजा की जाती है ।
- जिनकी कुंडली में प्रेम का अभाव हो, उन्हें इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा करनी चाहिए ।
- वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर करने के लिए भी इस दिन पूजा की जाती है ।

 

ऐसे मनाये फुलेरा दूज का पर्व
- शाम को स्नान करके पूरा श्रृंगार करें ।
- राधा-कृष्ण को सुगन्धित फूलों से सजाएं ।
- राधा-कृष्ण को सुगंध और अबीर-गुलाल भी अर्पित कर सकते हैं ।
- प्रसाद में सफेद मिठाई, पंचामृत और मिश्री अर्पित करें ।
- इसके बाद 'मधुराष्टक' या 'राधा कृपा कटाक्ष' का पाठ करें ।
- अगर पाठ करना कठिन हो तो केवल 'राधेकृष्ण' का जाप कर सकते हैं ।
- श्रृंगार की वस्तुओं का दान करें और प्रसाद ग्रहण करें ।

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