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Saturday, 2 March 2019

गर्भ में शिशु का ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

गर्भ में जटिल बीमारी से पीडि़त बच्ची का लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने गर्भ में ही ऑपरेशन कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इंग्लैंड की रहने वाली 26 वर्षीय एक महिला अपने होने वाले बच्चे को लेकर काफी उत्साहित थी। 20वें हफ्ते में सोनोग्राफी जांच हुई तो पता चला कि गर्भ में पल रही बच्ची को ‘स्पाइना बिफिडा’ नाम की जन्मजात जटिल बीमारी है। इसमें रीढ़ की हड्डी और उससे जुड़ी मेरुदंड का विकास नहीं हुआ था। इस स्थिति को देखने के बाद डॉक्टरों ने बताया कि गर्भपात करना होगा, या बच्चे के जन्म के बाद लंबा इलाज कराना पड़ेगा या गर्भ में ऑपरेशन करना पड़ेगा।

महिला की रजामंदी के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन से तकलीफ को दूर कर दिया। ऑपरेशन के बाद महिला ने कहा कि वे किसी हालत में अपने बच्चे को नहीं खोना चाहती थी क्योंकि उन्होंने उसे किक मारते हुए महसूस किया था और मुझे लगता था कि वे ठीक हो जाएगा और सामान्य बच्चों की तरह रहेगा। वहीं इस मामले में मनोरो विशेषज्ञों का मानना है कि मां की इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच का गर्भ में पल रहे शिशु पर असर पड़ा जिससे सफल सर्जरी हुई।

जानिए क्या होती है ये बीमारी क्या पड़ता है असर

स्पाइना बिफिडा एक ऐसी बीमारी है जिसमें दिमाग और स्पाइन कॉर्ड को जोडऩे वाली ट्यूब खुली रह जाती है। इस वजह से रीढ़ की हड्डी और एमनॉटिक फ्लूड में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। इससे रीढ़ की हड्डी की कोशिकाओ के खराब होने की संभावना भी अधिक रहती है। फिलेडेल्फिया के चिल्ड्रेन हॉस्पिअल के सर्जन स्कॉट एडजिक का कहना है कि इस तरह की बीमारी का गर्भ में इलाज नहीं किया जाए तो बच्चे में लकवा की शिकायत हो सकती है। कुछ परिस्थितियों में दिमाग को भी नुकसान होता है जिससे बच्चे को सांस लेने और सूजन की तकलीफ हो सकती है। एडजिक कहते हैं कि इस बीमारी का इलाज ऑपरेशन से पूरी तरह संभव नहीं है लेकिन इस बच्चे में गजब का परिणाम देखा गया है जो चौंकाने वाला है। हालांकि मां को अब उस पल का इंतजार है जब वे अपनी बच्ची को जन्म देंगी और उसे अपने गोद में रखेंगी। इन्होंने बच्ची का नाम ‘एलुसी’ रखा है जिसका मतलब स्वस्थ होता है।

  • 28 दिन जब गर्भधारण के हो जाते हैं तो ये ट्यूब अपने आप बंद हो जाती है।
  • 4 फीसदी मामलों में ये बीमारी दूसरे बच्चे को भी हो सकती है।
  • 1000 में दो बच्चों को ऐसी तकलीफ भारत में होती है।
  • 25 हफ्ते बाद इस तरह की बीमारी में गर्भ के भीतर ऑपरेशन संभव नहीं है।


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