शरीर में कफ के असंतुलन से होती हैं तमाम बीमारियां - My Breaking News

Breaking

Home Top Ad

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Tuesday, 19 March 2019

शरीर में कफ के असंतुलन से होती हैं तमाम बीमारियां

आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ को स्वस्थ शरीर के लिए सबसे अहम मना गया है। इनमें असंतुलन या कुछ गड़बड़ी होने पर सेहत खराब होने लगती है। शरीर में कफ का असंतुलन व्यायाम न करने, अधिक गरिष्ठ भोजन खाने से होता है। इस स्थिति में शरीर के तापमान में बदलाव होने से कई बार कफ संबंधी रोग हा़े सकते हैं।

1. तृप्ति- तृप्त होना (पूरी तरह से भारी पदार्थों के सेवन से तृप्त होकर शरीर में कफ बढ़कर भारीपन आ जाना)।

2. तन्द्रा-ऊंघना (नींद की झपकी लेना)

3. निद्रा का अधिक आना

4. स्तैमित्य- शरीर जकड़ जाना या कोई अंग जकड़ जाना।

5. शरीर में भारीपन

6. आलस्य

7. मुख का मीठापन।

8. मुख से पानी गिरना।

9. कफ निकलना।

10. नेत्र से गंदा पानी बार-बार निकलना।

11. बलासक- बल का क्षय या मंद ज्वर या शोथ का होना।

12. अपच (बदहजमी)।

13. हृदय पर कफ का लेप।

14. कंठ में कफ जैसा अनुभव करना।

15. धमनियों का कफ से भरा होना।

16. गलगण्ड- (गर्दन के पीछे वाले हिस्से में गांठ)। थायरॉइड ग्रंथि के बढ़ने से गांठ हो जाती है जिसे गलगण्ड कहते हैं, अधिक बढ़ने पर आंखें बाहर आने लगती हैं।

17. अतिस्थूलता- अधिक मोटापा,

18. मन्दाग्नि- भूख की कमी।

19. उदर्द (एलर्जी जैसा)- त्वचा में लाल-लाल ददोड़े होना, खुजली होना।

20. शरीर का श्वेत होना (सफेद पडऩा)।

कलरिंग से मिलता सुकून -
आर्ट थेरेपिस्ट का मानना है कि के्रयॉन व स्केच पेन से किसी ज्योमेट्रिक आकार में विभिन्न रंग भरने से दिमाग को सुकून मिलता है। डिप्रेशन, तनाव, आदि मानसिक समस्याओं से राहत पाने के लिए रंग भरना अच्छी एक्टिविटी है। लेकिन सादा कागज पर रंग चलाने के बजाय एकाग्रचित्त होकर रंगोली या ज्योमेट्रिक डिजायनों में रंग भरना ही फायदेमंद होता है।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal http://bit.ly/2W7rhSz

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages